केदारनाथ में आस्था का सैलाब: 11 दिन में 3 लाख पार, बर्फबारी भी नहीं रोक पाई ‘शिवभक्तों’ के कदम
हिमालय की उत्तुंग चोटियों के मध्य विराजमान देवाधिदेव महादेव के पावन धाम ‘केदारनाथ’ में इन दिनों भक्ति का ऐसा ज्वार उठा है कि कपाट खुलने के महज 11 दिनों में ही इतिहास के पन्ने पलट गए हैं। 22 अप्रैल को जैसे ही बाबा के द्वार खुले, मानो आस्था का बांध टूट पड़ा हो। अब तक 3 लाख से अधिक शिवभक्त बाबा के दर्शन कर पुण्य कमा चुके हैं, जो अपने आप में एक नया कीर्तिमान है।
टूटे पिछले सारे कीर्तिमान
बीते वर्षों की तुलना में इस बार श्रद्धालुओं की आमद ने सांख्यिकी के तमाम अनुमानों को बौना साबित कर दिया है। जहाँ पहले दो हफ्तों में भीड़ का ग्राफ धीरे-धीरे बढ़ता था, वहीं इस साल शुरुआती दिनों में ही ‘भक्ति का महाकुंभ’ लग गया है। इस अभूतपूर्व भीड़ ने रुद्रप्रयाग के बेस कैंप से लेकर केदारनाथ की पहाड़ियों तक, प्रशासन की चाक-चौबंद तैयारियों को कड़ी चुनौती दे दी है।
कड़ी परीक्षा में सिस्टम
लाखों की इस भीड़ को संभालना किसी हिमालयी चुनौती से कम नहीं है। रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन और पुलिस बल के लिए पैदल मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक पैर रखने की जगह बनाना मुश्किल हो रहा है। यात्रियों के ठहरने, भोजन और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव इतना बढ़ गया है कि अब अधिकारी ‘क्राउड मैनेजमेंट’ के लिए नई रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।
प्रकृति की चुनौती बनाम अटूट विश्वास
बर्फीली हवाओं और दुर्गम रास्तों के बावजूद, भक्तों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। सुबह की पहली किरण के साथ ही जय केदार के उद्घोष से पूरी घाटी गूंज उठती है। प्रशासन की ओर से अब कतारों को व्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त बैरिकेडिंग और वॉलिंटियर्स की तैनाती की गई है ताकि हर श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से गर्भगृह तक पहुंच सके।
बड़ी बात:
यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी है, बल्कि इसने यह भी सिद्ध कर दिया है कि केदारघाटी के प्रति दुनिया भर के हिंदुओं का जुड़ाव और अधिक प्रगाढ़ हुआ है। अब प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि बढ़ती भीड़ के बीच यात्रा सुगम और सुरक्षित बनी रहे।
