विवेक विहार अग्निकांड: मौत की नींद सो गए 9 मासूम लोग, सुलगते सवालों के बीच प्रशासन की नींद टूटी

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देश की राजधानी एक बार फिर लापरवाही की आग में झुलस गई है। शनिवार की काली रात पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार इलाके के लिए काल बनकर आई। यहाँ एक चार मंजिला आवासीय इमारत में भीषण आग लगने से नौ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में तीन बच्चे और दो बुजुर्ग भी शामिल हैं। चीख-पुकार और धुएं के गुबार के बीच घंटों चली मशक्कत के बाद जब आग बुझी, तब तक सब कुछ राख हो चुका था।

आधी रात का तांडव: शॉर्ट सर्किट बना काल

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना शनिवार देर रात करीब 1:30 बजे की है। इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित मीटर बोर्ड में शॉर्ट सर्किट हुआ, जिसने पलक झपकते ही पास में खड़ी दो बाइक को अपनी चपेट में ले लिया। पेट्रोल के कारण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते सीढ़ियों के रास्ते पूरी इमारत को धुएं के चैंबर में बदल दिया। ऊपरी मंजिलों पर सो रहे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। धुएं के कारण दम घुटने से अधिकांश मौतें हुईं।

संकरी गलियों ने रोका दमकल का रास्ता

दमकल विभाग की 15 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन विवेक विहार की उन संकरी गलियों ने ‘देवदूतों’ का रास्ता रोक दिया। अग्निशमन अधिकारियों का कहना है कि संकरी गलियों में पार्क किए गए वाहनों और अवैध अतिक्रमण के कारण बड़ी गाड़ियां मौके तक नहीं पहुंच सकीं। जवानों ने सैकड़ों मीटर लंबी पाइप फैलाकर आग बुझाना शुरू किया, जिसमें बेशकीमती 20 मिनट बर्बाद हो गए। अगर गाड़ियां समय पर पहुंचतीं, तो शायद कुछ जानें बचाई जा सकती थीं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने किया मुआवजे का ऐलान

रविवार सुबह दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा किया। मलबे और राख के बीच खड़ी मुख्यमंत्री भावुक नजर आईं। उन्होंने इस घटना को “प्रशासनिक विफलता और मानवीय लापरवाही का चरम” बताया। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये और घायलों को 2-2 लाख रुपये की तत्काल सहायता राशि देने की घोषणा की है। साथ ही, उन्होंने मंडलायुक्त (Divisional Commissioner) को मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच सौंपते हुए 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है।

सुरक्षा मानकों की उड़ी धज्जियां: सुलगते सवाल

जांच में यह कड़वा सच सामने आया है कि इस आवासीय इमारत का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी किया जा रहा था। इमारत में न तो ‘फायर एग्जिट’ था और न ही अग्निशमन यंत्र (Extinguisher)।

  • अवैध निर्माण: क्या एमसीडी (MCD) के अधिकारियों को संकरी गलियों में बनी इस बहुमंजिला इमारत की अवैध बनावट नहीं दिखी?

  • लापरवाही: रिहायशी इलाके में ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण क्यों किया जा रहा था?

  • प्रशासनिक सुस्ती: मुंडका और उपहार जैसे बड़े हादसों के बाद भी दिल्ली के संकरे इलाकों के लिए कोई ठोस ‘फायर सेफ्टी ऑडिट’ क्यों नहीं हुआ?

गम और गुस्से में डूबा इलाका

हादसे के बाद विवेक विहार में सन्नाटा पसरा है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय निवासियों में प्रशासन के खिलाफ भारी रोष है। लोगों का आरोप है कि इलाके में बिजली के तारों का जंजाल और अवैध गोदामों की शिकायत कई बार की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पुलिस ने इमारत के मालिक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (IPC 304) का मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है। फिलहाल, फोरेंसिक टीम (FSL) मौके से नमूने इकट्ठा कर रही है ताकि आग लगने के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।


बड़ी बातें:

  1. मृतक: 9 (3 बच्चे, 2 बुजुर्ग, 4 युवा)

  2. घायल: 12 (4 की हालत गंभीर)

  3. कारण: प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट।

  4. कार्रवाई: न्यायिक जांच के आदेश, मालिक हिरासत में।

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