नेशनल: DRDO की कामयाबी और हाइपरसोनिक युग में भारत का प्रवेश
स्क्रैमजेट कंबस्टर का सफल परीक्षण:
भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने हैदराबाद में अपनी अत्याधुनिक प्रयोगशाला में ‘स्क्रैमजेट कंबस्टर’ का सफल जमीनी परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया। यह तकनीक हाइपरसोनिक प्रोपल्शन सिस्टम का हृदय मानी जाती है। सरल शब्दों में कहें तो, यह तकनीक मिसाइलों और विमानों को ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक (मैक 5+) रफ्तार देने में सक्षम बनाती है। इस परीक्षण के साथ ही भारत अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के उस विशिष्ट क्लब में शामिल हो गया है जिनके पास अपनी स्वतंत्र हाइपरसोनिक तकनीक है।
भविष्य की मिसाइल तकनीक:
स्क्रैमजेट इंजन का सफल परीक्षण भारत के भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रमों और ‘हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों’ के निर्माण के लिए आधारशिला है। पारंपरिक इंजनों के विपरीत, स्क्रैमजेट वातावरण से ही ऑक्सीजन लेकर ईंधन जलाता है, जिससे मिसाइल का वजन कम होता है और उसकी मारक क्षमता और गति अविश्वसनीय रूप से बढ़ जाती है। रक्षा वैज्ञानिकों के अनुसार, यह तकनीक भविष्य के युद्धों में ‘गेम चेंजर’ साबित होगी, क्योंकि हाइपरसोनिक मिसाइलों को दुनिया का कोई भी मौजूदा मिसाइल डिफेंस सिस्टम रोक नहीं सकता।
आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम:
DRDO के अध्यक्ष ने इस सफलता को भारतीय इंजीनियरों की कड़ी मेहनत का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि इस तकनीक का पूरी तरह स्वदेशी होना यह दर्शाता है कि भारत अब जटिल एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के लिए किसी बाहरी देश पर निर्भर नहीं है। यह परीक्षण न केवल सैन्य दृष्टि से बल्कि उपग्रहों को कम लागत में अंतरिक्ष में भेजने के लिए भी नई संभावनाएं खोलता है। आने वाले समय में इसके हवाई परीक्षणों की भी योजना बनाई गई है।
