उत्तराखंड: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की समीक्षा और ‘लाइफलाइन’ का भविष्य

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परियोजना का अवलोकन:

उत्तराखंड की भौगोलिक दूरियों को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच गई है। 9 मई को रेल विकास निगम (RVNL) के वरिष्ठ अधिकारियों ने देहरादून में मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के समक्ष इस प्रोजेक्ट की व्यापक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। यह 125 किलोमीटर लंबी रेल लाइन न केवल चारधाम यात्रियों के लिए सुगम होगी, बल्कि चीन सीमा की ओर सैन्य साजो-सामान ले जाने के लिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

सुरंग निर्माण में बड़ी सफलता:

प्रगति रिपोर्ट में जो सबसे उत्साहजनक आंकड़ा सामने आया, वह है सुरंग निर्माण का कार्य। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के तहत कुल प्रस्तावित सुरंगों का 85% निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। हिमालय की चुनौतीपूर्ण भूगर्भीय परिस्थितियों के बावजूद, आधुनिक मशीनों और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से कार्य को गति दी गई है। मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि यह प्रोजेक्ट उत्तराखंड की ‘लाइफलाइन’ है, जो पहाड़ की अर्थव्यवस्था और पर्यटन को पूरी तरह बदल देगा।

चुनौतियां और समय सीमा:

बैठक में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य के दौरान जल स्रोतों और घरों को होने वाले नुकसान की भरपाई और सुरक्षा के उपाय प्राथमिकता पर रखे जाएं। रेल मंत्रालय का लक्ष्य इस लाइन को साल के अंत तक परिचालन के लिए तैयार करना है। जब यह रेल सेवा शुरू होगी, तो ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की दूरी महज 2 घंटे में सिमट जाएगी, जो वर्तमान में सड़क मार्ग से 6 से 7 घंटे का समय लेती है।

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