जल जीवन मिशन: उत्तराखंड की ‘हर घर जल’ में बड़ी छलांग
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए हर घर तक पानी पहुँचाना एक भौगोलिक चुनौती थी, लेकिन जल जीवन मिशन (JJM) के तहत राज्य ने एक ऐसी सफलता हासिल की है, जिसकी सराहना राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है।
ग्रामीण जीवन में क्रांतिकारी बदलाव
राज्य के कुल 14.48 लाख ग्रामीण परिवारों में से अब तक 14.20 लाख (यानी 98%) घरों को नल से जल के कनेक्शन से जोड़ दिया गया है। यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने ग्रामीण महिलाओं के जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। पहले पहाड़ी इलाकों में महिलाओं को मीलों पैदल चलकर गधेरों (प्राकृतिक स्रोतों) से पानी लाना पड़ता था, जिसमें उनका काफी समय और श्रम बर्बाद होता था। अब घर के आंगन में नल होने से स्वास्थ्य और स्वच्छता के स्तर में भी सुधार आया है।
‘जेजेएम 2.0’: भविष्य की तैयारी
98% लक्ष्य पूरा करने के बाद अब उत्तराखंड सरकार ‘जेजेएम 2.0’ की ओर बढ़ रही है। इस नए चरण के दो मुख्य उद्देश्य हैं:
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जल स्रोतों का पुनर्जीवन (Sustainability): केवल नल लगाना काफी नहीं है, बल्कि उन स्रोतों को भी बचाना जरूरी है जहाँ से पानी आ रहा है। इसके लिए ‘चाल-खाल’ (पारंपरिक जल संचयन गड्ढे) और वृक्षारोपण पर जोर दिया जा रहा है।
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पानी की गुणवत्ता: अब सरकार हर गाँव में ‘वाटर टेस्टिंग किट’ और प्रशिक्षित कर्मियों के माध्यम से यह सुनिश्चित करेगी कि नलों से आने वाला पानी पूरी तरह स्वच्छ और पीने योग्य हो।
केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के इस मॉडल को अन्य पहाड़ी राज्यों के लिए एक उदाहरण माना है, क्योंकि विषम परिस्थितियों के बावजूद यहाँ मिशन की गति काफी तेज रही है।
