अलकनंदा घाटी के रानों गांव में रावल देवता के आगमन के साथ ही हर्षोल्लास पूर्वक पांडव लीला का हुआ शुभारंभ, रविवार को बांणो के साथ हुआ पांडव नृत्य

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विकासखंड पोखरी के तहत अलकनंदा घाटी के गांव रानों में गांव के आराध्य रावल देवता के आगमन से पांडव लीला का शुभारंभ हुआ।रविवार को लक्ष्मी नारायण मंदिर से पांडवों के अस्त्र शस्त्रों को लाया गया। स्नान करवाने के बाद विधि-विधान पूर्वक पंडित कान्ता प्रसाद शैली द्वारा बाणों पर प्रांण प्रतिष्ठा चढ़ाई गई।

बताते चलें कि पांडव लीला का शुभारंभ 18 दिसम्बर को भूमि के भुमियाल रावल देवता के मंदिर में पूजा अर्चना के साथ रावल देवता की मूर्ति (फर्श) को विधि-विधान के साथ पांडव चौक स्थित पूजा घर में स्थापित किया गया था। रविवार को पांडवों के अस्त्र शस्त्र आने से लीला का आकर्षण बढ़ने से दर्शकों की भीड़ उमड़ने लगी है।

पांडव लीला सांस्कृतिक कमेटी के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह भंडारी ने कहा कि पांडव नृत्य के प्रति ग्रामवासियों में बेहद उत्साह का वातावरण बना हुआ है। उन्होंने कहा कि आराध्य देव रावल देवता के आगमन के साथ शुक्रवार से पौराणिक पांडव लीला प्रारंभ हो गई थी। उन्होंने बताया कि 21 दिसंबर को पांडव देवताओं के अस्त्र शस्त्रों का आगमन होने पर अब बाणों के साथ पांडव नृत्य शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि 25 दिसंबर को सांवला वृक्ष का आगमन, 26 को राजसूय यज्ञ, 27 को द्रौपदी चीरहरण, 28 को चक्रव्यूह मंचन (सेरा कौतिक) की लीला का मंचन किया जायेगा। 29 को ग्राम भ्रमण व पांडवों के अस्त्र शस्त्रों के साथ पांडवों का गंगा स्नान और 30 दिसंबर को रावल देवता का अपने मंदिर में विराजमान होने के साथ ही 13 दिनों से हो रही लीला का समापन हो जायेगा।

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