उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 20-साल की सज़ा रद्द की

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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हल्द्वानी में 2018 में एक मानसिक रुप से अस्वस्थ महिला की कथित सामूहिक बलात्कार मामले में पहले सुनाई गई 20-साल की कैद की सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पाया कि इस मामले में फोरेंसिक साक्ष्य के संग्रहण और हैंडलिंग में गंभीर चूकें हुई हैं, जिससे बनी परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठते हैं। उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि साक्ष्य की जाँच और डीटेल प्रक्रिया सही तरीके से नहीं हुई तो दोषसिद्धि को बनाए रखना न्याय का हित नहीं होगा। यह फैसला न्यायिक प्रक्रियाओं और साक्ष्य-संग्रह की गुणवत्ता पर एक अहम precedent के रूप में देखा जा रहा है, खासकर संवेदनशील अपराधों में। इस फैसले ने समाज में व्यापक चर्चा और बहस को जन्म दिया है कि अपराधियों के खिलाफ अभियोजन और आरोप सिद्धि में साक्ष्य एकत्रण कितना निर्णायक होता है।

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