देहरादून में आयोजित तीन दिवसीय विशेष सत्र का हुआ समापन।

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उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है। तीन दिनों तक चला उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र हंगामेदार रहा।विधानसभा के विशेष सत्र में कमीशनखोरी,पलायन,गैरसैंण जैसे मुद्दों पर जमकर बहस हुई। इस दौरान पक्ष और विक्षक्ष की नोकझोंक भी देखने को मिली।

उत्तराखंड स्थापना के रजत जयंती वर्ष पर तीन दिवसीय विशेष सत्र का आज समापन हो गया है । समापन के बाद संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि सदस्यों की उत्सुकता को देखते हुए पहली बार राज्य में सत्र की अवधि को बढ़ाने का काम किया गया। इस सत्र के दौरान 25 वर्षों में आई चुनौतियों ओर विकास के बारे में चर्चा की गई जिसमें सभी विधायकों ने सहयोग किया।जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए ये सत्र हमेशा याद किया जाएगा।

तीन दिवसीय विशेष सत्र के समापन पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि जो परिचर्चा हुई उसमें सत्ता पक्ष की ओर से जो लेखा जोखा पेश किया गया वो मात्र झूठ का पुलिंदा है और सच से परे है। उन्होंने कहा कि सत्तापक्ष द्वारा सदन में प्रस्तुत किए गए आंकड़ों और उपलब्धियों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य के विकास की वास्तविक तस्वीर सामने लाने के लिए कांग्रेस के दस और भाजपा के तेरह वर्षों के कार्यकाल की तुलनात्मक समीक्षा आवश्यक है।यशपाल आर्य ने कहा कि राज्य निर्माण के मूल उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए सरकार को आगे के लिए ठोस रोडमैप तैयार करना चाहिए, जिससे रोजगार,औद्योगिक विकास और जनकल्याण को नई दिशा मिल सके।

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