गंगोत्री में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन के बाद अब केदारनाथ-बद्रीनाथ में भी मांग तेज,मुस्लिम ऐसे ले सकते है प्रवेश
उत्तराखंड के गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद अब यह मुद्दा चारधाम क्षेत्र में व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। गंगोत्री मंदिर समिति ने आगामी चारधाम यात्रा से केवल हिंदू श्रद्धालुओं को ही मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति देने का निर्णय लिया है।
गंगोत्री मंदिर समिति के इस फैसले के बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम को लेकर भी इसी तरह के कदम की तैयारी शुरू हो गई है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष ने संकेत दिए हैं कि समिति भी इसी तर्ज पर निर्णय ले सकती है। उन्होंने कहा कि यह कोई नया विचार नहीं है, बल्कि पौराणिक काल में भी शंकराचार्य द्वारा ऐसे निर्णय लिए गए थे और आज उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है
यदि यह फैसला लागू होता है तो बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम के साथ-साथ इनके अधीन आने वाले कुल 46 मंदिरों में भी गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित हो जाएगा।
इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करते हुए मंदिर समिति के अध्यक्ष ने कहा कि सिख, जैन और बौद्ध समुदाय को लेकर जो भ्रम की स्थिति बनी हुई है, वह सही नहीं है। उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के अनुसार ये सभी समुदाय हिंदू धर्म की व्यापक परंपरा के अंतर्गत आते हैं, इसलिए इन्हें इस प्रतिबंध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।
मंदिर समिति की ओर से जल्द ही एक बोर्ड बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि गैर-हिंदुओं के लिए प्रतिबंध की सीमा क्या होगी और यह नियम किन-किन स्थानों पर लागू किया जाएगा। समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि कई ऐसे लोग, जिनमें कुछ सेलिब्रिटी, विशेष प्रमुख लोग भी शामिल हैं, जो सनातन धर्म में आस्था रखते हैं उनके लिए यह बैन नहीं है
समिति अध्यक्ष ने कहा कि यह निर्णय उन तत्वों को ध्यान में रखकर लिया जा रहा है, जिन पर अवैध गतिविधियों, अतिक्रमण और धार्मिक स्थलों की मर्यादा को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं। जिन्होंने विगत सालों में जंगल के और खाली जमीनों में अवैध रूप से मजारों का निर्माण कर दिया है और आगेऐसा ना हो यह फैसला लिया गया है।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि मंदिर परिसर की सुरक्षा में तैनात अर्धसैनिक बलों पर यह नियम लागू नहीं होगा, क्योंकि वे देश की सेवा में लगे हैं। इसके अलावा वीआईपी मूवमेंट के दौरान भी इस नियम में छूट रहेगी। घोड़े-खच्चर संचालकों और मजदूरों को लेकर भी अलग दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे।
